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मैं अपनी असलियत आईने में देखा लेता हुं......!!! Hindi suvichar

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                     जब भी तारीफ करती है,                            ये दुनिया मेरी...!                        मैं घर जाकर आईने में,                 अपनी "असलियत" देख लेता हुं...!!                           मेरी आवाज़ कभी,              उनकी "आवाज़" से ऊंची नहीं होती...!                   मैं अपने "पिता" की आंखों में,                 अपना बचपन जो देख लेता हुं....!!                           अपनी "तन्हाई" पर,                    जब तरस आने लगता है...

अक्सर प्यार में क्यों ये एहसास होता है...?? Hindi love Poem

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  अक्सर प्यार में क्यों, ये एहसास होता है?    कभी ये दिल खुश तो  कभी उदास होता है, तन्हा रहना ही, दे जाता है सुकून, लेकिन,  तन्हाई में भी जैसे को, आस पास होता है,  आ कर के फिर चला जाता है, कोई यादों से,   बहला जाता है वो, अपनी प्यारी बातों से,  जुदाई का एक पल भी जैसे,  बनवास होता है,  लेकिन तन्हाई में जैसे,  वो आस पास होता है,  तरसती हैं आँखें,  उसके दीदार के लिए,   लब साथ नहीं देते,  इश्क के इज़हार के लिए, पूरी महफ़िल में क्यों,  वही एक खास होता है? और  तन्हाई में अक्सर,  वही आस पास होता है..!!! प्रविन......... तेरा मेरा साथ रहे 👫💞 Akshar pyar me, Kyun aisa hota hai..... Kabhi ye Dil Khush to, Kabhi udas hota hai..... Tanha rahena hi, De jata hai sukoon lekin, Tanhai me bhi Jase, Koi aas-paas hota hai..... Aa Kar ke fir Chala jata hai, koi yaadon se, Bahla jata hai vo, Apni Pyari bato se, Judai ka ek pal bhi jaise, ba...

ना होती अगर मर्ज़ी ऊपर वाले की.....!!! Hindi suvichar

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ना होती अगर मर्ज़ी ऊपर वाले की, परिंदों को उड़ने के लिए आसमान न होता.....! होती तो कायनात मगर कायनात में, खुद को रब समझने वाला इंसान न होता.....! सिर्फ इल्म होता, इश्क़ होता और इबादत होती, हर शख्स के अंदर अगर शैतान न होता.....! रब एक ही रहता अगर खुदगर्जी न होती, मस्जिद में खुदा और मंदिर में भगवान् न होता....!!! प्रभात...........

सुबह चाय की चुस्की.......!!! Hindi suvichar

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                     सुबह चाय की चुस्की.......                     चाय की चुस्की के साथ ....               जीवन के समंदर में डूबकी लगाते हैं...                     खुशनुमा पलों के सिपों से. .                 यादों के मोती चुन कर लाते हैं...       हम फिर से वही किस्से कहानियां गुन गुनाते हैं...            जिन्हें याद कर हम आज भी मुस्कुराते हैं ...                       क्यूंकि यही वो पल है....  ...

तेरा एहसास मुझको छूता है.....!!! Hindi love Poem

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जब जब तेरा एहसास मुझको छूता है,       ना जाने फिर इस दिल को क्या होता है...! संग मेरे हँसने लगते हैं सारे सितारे,       और ये बादल भी मुझे देख कर रोता है....! तेरी याद में मेरे साथ जागती हैं रातें,       और मेरा हर आँसु चाँद को भिगोता है....! तेरे करीब आने से बढ़ जाती है बेकरारी,        पर तुझसे दूर होते ही ये मन चैन खोता है....! तू रहती है मौजूद हर पल मेरे ख्यालों में,          मुझे सोच कर क्या तू भी रातों को नहीं सोती है....? Jab tera ehsas, mujhko chhuta hai....! Na Jane fir is Dil ko, Kya hota hai....! Sang mere hansne,  lagte Hain sitare.....! Aur ye badal, mujhe dekh Kar rota hai.....! Teri yaad me mere sath, jagti hai Raten, Aur mera har ansu, Chan ko bhigota hai....! Tere karib aane se, badh jati hai bekarari, Par tujhse door hote hi, ye man chain khota hai....! Tu raheti hai har pal, maojud mere khayalo me, Mujhe soch Kar Kya tu bhi, Raton ...

माचिस की तीलियां......!!! Hindi suvichar

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एक सी दिखती है, माचिस की सारी तीलियां, कुछ ने दिये जलाये...और कुछ ने घर....! कुछ ने महकाई मंदिरों में अगरबत्तीयां, तो कुछ ने सुलगाये सिगरेट के कश.....! कहीं सुलगाया चूल्हा तो बनी रोटीयां, तो कहीं फटे बंम और बिखरी बोटियां.....! जलाई कहीं शादी में हवन कुंड की अगन, तो फूंकी गई कहीं दहेज की खातिर कई बेटीयां....! काजल बनाया कहीं नवजात शिशु का, तो कहीं शमशान में किसी चिता को जलाया.....! जला के आग ठिठुरती ठंड में गरीबों को बचाया, तो बन के कहीं बाॅन फायर रईसों को रिझाया.....! एक सी दिखती थी माचिस की सारी तीलियां, पर इंसानों के हाथ आते ही सबने अगर ही किरदार निभाया.....!! Ek si dikhti hai, Machis ki sari teeliyan, Kuchh ne diye jalaye, To kuchh ne Ghar.....! Kuchh ne mahkai, Mandir me agarbttiyan, To kuchh ne sugaye, Cigarette ke Kash.....! Kanhi sulgaya chulha, To bani rotiyan, To kanhi fate bum, Aur bikhri botiyan......! Jalai gai shadi me, Hawan kund ki agan, To funki gai kanhi, Dahej ki khatir Kai betiyan.....! Kazal banaya ka...

मेरी आदत नही.....!!! Hindi habit poem

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किसी को तकलीफ़ देना मेरी आदत नही, बिन बुलाया मेहमान बनना मेरी आदत नही....! मैं अपने गम में भी रहता हूं नवाबों की तरह, परायी खुशियों के पास जाना मेरी आदत नही.....! हमेशा सबको हंसता ही देखना चाहता हूं मैं, किसी को धोखे से भी रुलाना मेरी आदत नही.....! बांटना चाहता हूं तो बस प्यार और मोहब्बत सबसे, यूं लोगों में नफ़रत फैलाना मेरी आदत नही.....! जिंदगी मिट भी जाए किसी की खातिर तो गम नही, बद्दुआओं के साथ जीने की मेरी आदत नही.....! सबसे दोस्ती की हैसियत से बोल देता हूं, किसी का दिल दुखाने की मेरी आदत नही.....! दोस्ती होती है दिल से चाहने पर, किसी से जबरदस्ती दोस्ती करना मेरी आदत नही....!! प्रभात.........